ग्रेटा थनबर्ग कौन हैं?

ग्रेटा थनबर्ग कौन हैं, भाषण, जीवन परिचय (Nobel Peace Prize Winner Greta Thunberg Biography in Hindi, Parents, Quotes, Award, Country, Speech)

ऐसा कहा जाता है कि बच्चों की परवरिश पर निर्भर करता है कि वह बड़े होकर क्या बनेंगे और किस तरह का व्यवहार करेंगे. बच्चों का पूरी तरह से व्यवहार निर्माण करने की ज़िम्मेदारी माता-पिता की होती है जिस तरह माता-पिता बच्चे को सिखाते हैं ठीक उसी तरह वह अपने जीवन में व्यवहारिक रूप लेकर आता है. परंतु यदि आज का वर्तमान समय देखा जाए तो आज के बच्चे पहले से ही इतने समझदार हैं कि माता-पिता को समझाने की जरूरत ही नहीं पड़ती हैं. अपनी काबिलियत के दम पर वे हासिल कर लेते हैं जो कभी उनके मां-बाप सोच भी नहीं पाते हैं. एक ऐसा ही करिश्मा 16 साल की एक लड़की ने कर दिखाया है जिसने अपने देश में ही नहीं बल्कि दूरदराज देशों में भी अपना नाम बुलंदियों पर कर लिया है. जी हां उस लड़की का नाम है ग्रेटा थनबर्ग आइए जानते हैं उसके बारे में विस्तार से –

Greta Thunberg biography in hindi

ग्रेटा थनबर्ग कौन है ? (Who is Greta Thunberg)

ग्रेटा थनबर्ग एक 16 साल की लड़की है जो एक विद्यार्थी होने के साथ-साथ आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रभावित व्यक्तित्व है जिसने लाखों करोड़ों लोगों को अपनी बात से जुड़ने के लिए मजबूर कर दिया है. वे एक ऐसी 16 साल की लड़की है जिन्होंने अपने विचारों से पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है और उनके विचार बस यही है कि वे अपनी प्रकृति को बचाना चाहती हैं. अपनी प्रकृति को बचाने के लिए 8 साल की उम्र से भी कम में प्रकृति की परेशानियों को अपनी परेशानियां समझकर सुलझाने में लगी हुई है. प्रकृति के लिए उनके इस जुड़ाव में आज उन्हें पूरी दुनिया का एक प्रभावी चेहरा बना दिया है जो अपने देश को नहीं बल्कि पूरी दुनिया को बदलना चाहता है.

ग्रेटा थनबर्ग का जन्म एवं परिवार (Greta Thunberg Birthday and Family)

ग्रेटा थनबर्ग एक ऐसी लड़की जिसने पूरी दुनिया को बदलने का हौसला सबके सामने दिखाया है. उसका जन्म 3 जनवरी 2003 को स्टॉकहॉम नामक एक छोटे से शहर में हुआ था. उनकी माता जिनका नाम मालाएना एर्नमर्ग है वे एक ओपेरा गायिका है. उनके पिता एक अभिनेता है जिनका नाम सवांटे थनबर्ग है. ग्रेटा का जुड़ाव प्रकृति के प्रति उसके बालपन से ही रहा है. जिस समय वह तीसरी कक्षा में थी, उसी समय से अपने पर्यावरण में होने वाले नुकसान और ग्लोबल वार्मिंग के प्रति उनमें इतनी जागरुकता आ गई थी कि उसके बारे में सोचते सोचते भी परेशान हो गई थी और डिप्रेशन में चली गई थी. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखा और मात्र 8 वर्ष की आयु में उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के बारे में सब कुछ जान लिया और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बातें करने लगी.

वातावरण के प्रति ग्रेटा थनबर्ग का लगाव (Greta Thunberg Atmospheric Physics)

वह वातावरण के बारे में इतना कुछ जानना चाहती थी और जान चुकी थी, जिसको लेकर उन्होंने स्वीडिश सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया था. वह उस समय सिर्फ अपने पर्यावरण के बारे में सोचती रहती और इस बात पर ध्यान देती कि जानवरों को मनुष्य द्वारा कितना नुकसान पहुंचाया जा रहा है किस तरह से ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है. आज की दुनिया की वह ऐसी भावी पीढ़ी है जिसने पर्यावरण की समस्या को गंभीरता से लेते हुए एक ऐसा कदम उठाया है जिसने उसके साथ मिलियन लोगों को लाकर खड़ा कर दिया है. वे पर्यावरण के बारे में इतना अधिक सोचने लगी कि वह कई सारी बीमारियों की शिकार हो गई. उन्होंने किसी से भी बात करना बंद कर दिया, यहां तक कि उन्होंने अपनी चिंताओं के चलते स्कूल जाना भी बंद कर दिया. उनको एस्पर्जर सिंड्रोम नामक बीमारी हो गई थी. इस बीमारी के होने के बाद भी उन्होंने खुद को कमजोर नहीं माना है बल्कि अपनी इस बीमारी को मजबूती मानते हुए आगे बढ़ रही हैं और अपने पर्यावरण के लिए संघर्ष कर रही हैं. ऐसे रोगी दिमाग से बिल्कुल एक ही चीज को सोचने पर मजबूर हो जाते हैं और वह किसी को भी सीधा मुंह पर जवाब दे देते हैं और बिल्कुल भी नहीं सोचते हैं.

पर्यावरण को लेकर वह इतना अधिक सोचती थी कि उन्होंने खाना-पीना तक बंद कर दिया, मात्र 11 साल की उम्र में वे डिप्रेशन में डूब गई. इस वजह से 2 महीने में ही उनका 10 किलो भार कम हो गया. पर्यावरण के खिलाफ इस संघर्ष में उनके परिवार वालों ने भी उनकी बहुत मदद की, जिससे वह दिन प्रतिदिन आगे बढ़ती गई और आज इस मुकाम पर पहुंच गई हैं कि उनके साथ पूरी दुनिया के लोग जुड़ चुके हैं. पर्यावरण के प्रति उनकी जागरूकता ने अपने माता-पिता को शाकाहारी बना दिया क्योंकि उनका यह सोचना है कि पर्यावरण में मौजूद जानवरों को मारकर खाना हमारे लिए गलत बात है. इससे हम अपने पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं और पर्यावरण को नष्ट करने के लिए अपने कदम प्रतिदिन बढ़ाते जा रहे हैं. उन्होंने खुद ही अकेले पर्यावरण को बदलने के लिए लोगों को प्रेरित करना चाहा, जिसके लिए उन्होंने कई सारे पर्चे भी बांटे और अलग-अलग जगह पर जाकर लोगों को पर्यावरण की महत्वता को समझाया.

ग्रेटा थनबर्ग के जीवन के संघर्ष (Greta Thunberg Life Struggles)

उन्होंने अपने जीवन का सबसे पहला संघर्ष अपने स्कूल में बंदूक रखना बंद कराना शुरू किया. मतलब वहां के बच्चों और बड़ों को अपने पास हथियार रखने की पूरी स्वतंत्रता होती है. वे किसी भी समय किसी के ऊपर भी वार कर सकते हैं और उसका जीवन समाप्त कर सकते हैं. इस बात के खिलाफ उन्होंने अपना कदम उठाया और स्वीडिश सरकार के खिलाफ आवाज उठाई कि इस नियम को बिल्कुल खत्म कर देना चाहिए. जिसमें उन्हें स्कूल में रहकर पढ़ाई करनी चाहिए और नई चीजें सीखनी चाहिए. ऐसे समय में वह अपने देश में नया बदलाव लाने की सोच रखते हुए आगे बढ़ रही थी. मात्र 15 साल की बच्ची ने स्वीडिश सरकार को हिला कर रख दिया और उन्हें यह नियम बदलने पर मजबूर कर दिया.

फिर उन्होंने अपने मुख्य मिशन पर्यावरण के खिलाफ आवाज उठाई और एक प्रोग्राम के दौरान एक ऐसी स्पीच दी जिसने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया. उन्होंने अपनी स्पीच की पहली लाइन में सरकार से यही कहा कि “आपने मेरे बचपन को ख़राब करके रख दिया, आपने मेरे सपनों को कुचल कर रख दिया है”. वे अपने पर्यावरण के प्रति इतनी अधिक परेशान है कि उन्होंने एरोप्लेन और कार जैसी चीजों से यात्रा करनी ही बंद कर दी है वे कहीं भी जाने के लिए अपनी साइकिल का सहारा लेती हैं, लोगों को यह बताने के लिए कि हमें इन टेक्नोलॉजी का सहारा नहीं लेना चाहिए. उन्होंने यूके जाने के लिए नाव का सहारा लिया. एक छोटी सी नाव पर यात्रा करने के लिए वे अपने घर से 14 अगस्त को निकली थी और 28 अगस्त को यूके पहुँची. वहां पर यह कई बड़े-बड़े लोगों से मिली और पर्यावरण के मुद्दे पर बात की. उन्होंने वहां पर अपनी समस्याओं को रखा और बताया कि किस तरह से कार्बन एममिशन्स ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा कारण बन रहा है.

ग्रेटा थनबर्ग द्वारा पर्यावरण के लिए उठाए गए कदम (Greta Thunberg Environment).

ग्रेटा ने पर्यावरण के लिए कई कड़े कदम उठाए.

  • 23 सितंबर 2015 को पेरिस जलवायु समझौते के तहत उन्होंने ग्रीनहाउस से निकलने वाली गैसों को रोकने के लिए अपनी आवाज उठाई. जिसके लिए उन्होंने 27 सितंबर को दुनियाभर में हड़ताल की योजना बनाई थी.
  • साल 2018 में उन्होंने मात्र 15 साल की उम्र में स्वीडिश अखबार स्वेंस्का डगबलेट में पर्यावरण के प्रति अपने विचारों को प्रकट करते हुए एक लेख लिखा और लोगों को उससे प्रभावित किया. उनके इस निबंध ने उन्हें प्रतियोगिता का विजेता भी बनाया और वह निबंध समाचार पत्र में प्रकाशित भी किया गया.
  • मात्र 16 साल की उम्र में साल 2018 की शुरुआत में उन्होंने पूरे विश्व में ग्लोबल क्लाइमेट स्ट्राइक का प्रचार कर दिया और अपनी सरकार के खिलाफ क्लाइमेट के लिए मोर्चा निकालना शुरू कर दिया. वे हर शुक्रवार अपने स्कूल को छोड़कर सीधे पार्लियामेंट हाउस के बाहर जाकर बैठ जाती, जहां पर उनकी मुलाकात कई सारे बड़े नेताओं से भी हुई.
  • 24 मई तक उनकी इन बातों ने लगभग 130 देशों को इनकी ओर आकर्षित किया और जोड़ने पर मजबूर कर दिया. उनके साथ 11,00,000 छात्रों ने जुड़ने का फैसला लिया और उनके साथ रैली व कई सारे मार्च भी निकाले.
  • थनबर्ग की इस छोटी सी आवाज ने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया. उन्होंने अपने विचार रखते हुए बताया कि किस तरह विश्व में गर्मी बढ़ती जा रही है. यदि 2 डिग्री से कम तापमान चला जाता है तो इस पर्यावरण में हमारा सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा.
  • उन्होंने यूके के सामने यह मुद्दा रखा कि जिस तरह से वह जीवाश्म ईंधन का उपयोग कर रहे हैं, उसकी वजह से जितना कार्बन हमारे पर्यावरण में फैल रहा है. वह सबसे बड़ा कारण है ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देने का. इस प्रक्रिया को पूरी तरह से रोक देना चाहिए ताकि हमारे पर्यावरण को बचाया जा सके अन्यथा आने वाला समय ऐसा होगा कि जब हमें सांस लेने के लिए भी ऑक्सीजन सिलेंडर साथ लेकर चलने की आवश्यकता होगी.
  • पर्यावरण की बात करते समय उनकी आंख में आंसू आ जाते हैं. इसलिए वे अपने पर्यावरण को बचाने के लिए जगह-जगह जाकर आंदोलन कर रही हैं और लोगों को अपने पर्यावरण के प्रति जागरूक करना चाहती हैं.
  • उन्होंने बताया कि जिस तरह से हम प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं एक दिन हमारे महासागर पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे और समुद्री जीवन को भी नष्ट कर देंगे. विध्वंस को रोकने के लिए हमें बिल्कुल भी प्लास्टिक में बंद पानी या फिर किसी भी वस्तु को खरीदना नहीं चाहिए क्योंकि हम ऐसा करके खुद को एक ऐसी गहरी खाई में डाल रहे हैं जहां से निकल पाना भी बहुत मुश्किल होगा.
  • वे हर शुक्रवार को जब अपने स्कूल के समय पर पार्लियामेंट हाउस के बाहर जाती हैं, तो वहां पर बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ और नेता उनसे भेंट करते हैं. धीरे-धीरे वे मीडिया में और समाचार पत्रों में मशहूर होने लगी. उनके विचारों ने लोगों को इस कदर प्रभावित किया कि हड़ताल के 21 दिनों में ही उनके साथ लाखों लोग जुड़ चुके थे.
  • 15 मार्च 2019 का दिन उन्होंने इतिहास के पन्नों में लिखवा दिया क्योंकि उन्होंने जब पर्यावरण के खिलाफ हड़ताल का आव्हान किया तो 128 देशों के 2233 शहरों में से लगभग6 मिलियन लोगों ने आकर उनके साथ इस हड़ताल में हिस्सा लिया. उस लड़की ने जो संसद के बाहर खड़े होकर एक छोटा सा आंदोलन शुरू किया था, उनके प्रयासों से वह अंतरराष्ट्रीय आंदोलन के रूप में बदल गया.

ग्रेटा थनबर्ग के जीवन की उपलब्धियां (Greta Thunberg Achievements)

मात्र 16 साल की उम्र में ग्रेटा थनबर्ग कई सारी उपलब्धियाँ अपने नाम कर ली है.

  • सबसे पहली उपलब्धि उन्होंने एक स्वीडिश युवा आंदोलन की आवाज़ के रूप में हासिल की है जो अपने क्लाइमेट चेंज के लिए आवाज़ उठाती युवाओं की प्रेरणा बन गई है.
  • वैकल्पिक रूप से उन्हें जलवायु परिवर्तन के लिए आवाज उठाने के लिए वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया. जिसको राइट लाइवलीहुड अवॉर्ड भी कहा जाता है.
  • उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह भी है कि जब उन्होंने पर्यावरण के खिलाफ अकेले आवाज उठाना शुरू किया था तब वह अकेली थी, परंतु आज उनके साथ 150 से अधिक देशों के 40 लाख से भी अधिक लोग जुड़ गए हैं.
  • पर्यावरण के प्रति जागरूकता और समर्पण देखते हुए उन्होंने जो कदम उठाया है, उसके लिए उन्हें 10 लाख स्वीडिश क्रोनर अर्थात 10 लाख 3000 डॉलर या फिर 94000 यूरो की इनामी राशि से पुरस्कृत किया गया है.
  • पुरस्कार के रूप में उन्हें यह भी प्राप्त हुआ है कि वह आज विश्व की ऐसी युवा चेहरा बन चुके हैं, जिन्होंने अपने पर्यावरण की परेशानियों को समझते हुए अपने जीवन में सभी चीजों को त्याग कर एक अहम कदम उठाया है. जो आने वाले भावी पीढ़ी के लिए तो प्रेरणादायक है ही साथ ही वर्तमान पीढ़ी को भी काफी हद तक प्रेरित करता है.

ग्रेटा थनबर्ग जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें (Greta Thunberg Interesting Facts)

  • उनके माता-पिता का किसी भी ऐसे विज्ञान से जुड़ी बातों से संबंध नहीं है, परंतु उनके एक दूर के पारवारिक सदस्य जिनका नाम सवांटे ढ़ेन्हेंइस हैं वे एक वैज्ञानिक थे. उन्होंने सन 1896 में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के मुख्य कारणों में ग्रीन हाउस प्रभाव को बताया था.
  • वह 8 साल की थी जब उन्होंने क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग नामक बातों के बारे में सिर्फ सुना था और अपने शिक्षकों से इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की.
  • उन्होंने पर्यावरण के संरक्षण के लिए कदम उठाए, जिसमें से सबसे पहला कदम यह था कि उन्होंने खुद के खाने के लिए सब्जियां अपने घर के पास ही उगाना शुरू कर दिया.
  • 4 दिसंबर 2018 को मात्र 15 साल की उम्र में ग्रेटा संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सबसे कम उम्र वाली व्यक्ति बन गई जो वहां पर स्पीच देती हुई नजर आई. उन्होंने cop24 संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन शिखर को संबोधित किया और अपनी बात सबके सामने रखी.
  • 23 जनवरी 2019 को वर्ल्ड इकोनामिक फोरम को संबोधित करने के लिए वह ट्रेन से यात्रा की जिसमें उन्होंने 32 घंटे का सफर तय किया. वहीं दूसरी ओर इस फोरम में पहुंचने के लिए 1500 लोगों ने अपने निजी प्लेन का सहारा लिया जिसको ग्रेटा ने पर्यावरण के खिलाफ माना.
  • ग्रेटा को पालतू कुत्तों के साथ खेलने का बहुत शौक है. स्वीडन में जिस घर में वह रहती है वहां पर उनके पास दो पालतू कुत्ते हैं जिनके साथ वह अपना अधिक समय व्यतीत करती हैं और उनके साथ खेलती भी हैं.
  • अपने कड़े कदम और अथक प्रयासों की वजह से साल 2019 तक उनके प्रभावित कदमों ने उन्हें एक ऐसी जगह पर लाकर खड़ा कर दिया, कि टाइम मैगजीन के मालिक ने उनकी तस्वीर को मैगजीन के कवर पेज पर छापने की मिसाल कायम की. उनके कारनामों ने पूरी दुनिया को तो पहले ही हिला कर रख दिया था, बाद में जब उनकी पिक्चर इस मैगज़ीन पर नजर आई तो पूरे विश्व ने उन्हें एक नई पहचान के रूप में देखा.

अंत में यदि देखा जाए तो ग्रेटा थनबर्ग के जीवन से यही प्रेरणा मिलती है कि यदि एक लड़की इतना बड़ा आंदोलन उठा सकती है तो यह संसार का प्रत्येक युवा यदि अपने पर्यावरण के लिए कदम उठाए, तो हमारा पर्यावरण जो अंधेरे की खाई में गिरने जा रहा है वहां से उसे बचाया जा सकता है. पर्यावरण के प्रति जागरूक होना व पर्यावरण के संरक्षण को समझना आज के समय में बेहद जरूरी है. यदि उसको ना समझा जाए तो हमें खाने-पीने व रहने के लिए भी और साथ ही सांस लेने तक के लिए कोई जगह नहीं मिलेगी. अपने पर्यावरण से जुड़ी और ग्लोबल वार्मिंग से जुड़ी सभी परेशानियों को गंभीरता से लेना आज के समय में बेहद जरूरी है यह बात हमें ग्रेटा थनबर्ग के जीवन से सीखने को मिलती है.

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Anubhuti
यह मध्यप्रदेश के छोटे से शहर से है. ये पोस्ट ग्रेजुएट है, जिनको डांस, कुकिंग, घुमने एवम लिखने का शौक है. लिखने की कला को इन्होने अपना प्रोफेशन बनाया और घर बैठे काम करना शुरू किया. ये ज्यादातर कुकिंग, मोटिवेशनल कहानी, करंट अफेयर्स, फेमस लोगों के बारे में लिखती है.

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