अपने  बच्चों  के  लिए  सही  स्कूल  का  चुनाव  कैसे  करें ?

अपने  बच्चों  के  लिए  सही  स्कूल  का  चुनाव  कैसे  करें ? (How to choose best school for your child in hindi)

आजकल  के  दौर  में  अपने  बच्चों  के  लिए  सही  स्कूल  का  चुनाव  करना  किसी  कड़ी  चुनौती  से  कम  नहीं  है. हम मार्केट  में  जाते  हैं, किसी  भी  सामान  को  परचेस  करने  तो  हमें  बहुत  सारी  वैरायटी  और अलग-अलग  ऑफर  भी दिखाई  देते  हैं , सेम  वैसे  ही  आजकल  शिक्षा  के  क्षेत्र  में  कम्पटीशन इतना  बढ़  गया  है  कि,  अपने  बच्चों  के लिए  सही  स्कूल  का  चयन  करना  बहुत  ही  कठिन  हो  गया है.  हर  मां-बाप  चाहता  है, कि  उसके  बच्चे  को  एक अच्छी  शिक्षा  मिले   जिससे  वह  अपना  भविष्य  सवार  सके. हमारे  देश  में  तो  बहुत  से  ऐसे  स्कूल  हैं, जिनकी फीस  जिनकी ज्यादा  है, कि  कोई  सामान्य  व्यक्ति  उसमें  अपने  बच्चों  को  पढ़ाने  की  सोच  भी  नहीं  सकता  है. आज  हम  इस  लेख  के  माध्यम  से  आपको  कुछ  ऐसे  टिप्स  बताएंगे जिनके  जरिए  आपको  अपने  बच्चों  के लिए  स्कूल  चुनने  में  काफी  हद  तक  सहायता  हो  सकती  है.

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बच्चों के लिए स्कूल चुनने के बेस्ट तरीके क्या हैं ?

बच्चे जब शिक्षा ग्रहण करने के योग्य हो जाते हैं, तो मां-बाप को चिंता हो जाती है, कि उनके लिए ऐसे स्कूल की तलाश करें. जो हर मायने में उनके बच्चों के लिए उपयुक्त हो और उनके बच्चों के सुंदर भविष्य को संवारने में सक्षम हो और हो सके तो उनकी बजट के अंदर भी आता हो. अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए स्कूल का चयन करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें, जो निम्नलिखित हैं.

  1. स्कूल में टीचर पोलाइट स्वभाव वाला हो –

 जब बच्चा पहली बार मां का आंचल छोड़कर स्कूल पहुंचता है, तो उसे उस स्कूल में उतना ही प्यार और लाड मिलना चाहिए जितना उसकी मां से मिलता रहा है. बच्चों के लिए स्कूल भी अपनी दूसरी मां की तरह लगना चाहिए जहां पर वह उठता, बैठता है, बात करना और  डिसिप्लिन आदि सीखता है. स्कूल में बच्चे को लाड-प्यार करने वाले टीचर होने चाहिए, जो बच्चों को डांटने मारने के बजाय प्यार से हैंडल करते हो.

  1. घर से स्कूल की दूरी जितना हो सके उतनी कम हो –

अक्सर मां-बाप कंपटीशन के चक्कर में अपने बच्चों का एडमिशन अपने घर से इतना दूर करवा देते हैं, कि उनको ट्रैवलिंग करने में ही ज्यादा समय लग जाता है, भले से ही क्लास उनकी 2 या 4 घंटे की हो. जिससे बच्चा काफी थक जाता है, और अपनी पढ़ाई पर सही से ध्यान भी नहीं दे पाता है. कितना पढ़ाई बच्चों के लिए जरूरी है उतना ही बच्चों के लिए खेलकूद भी जरूरी है. यदि बच्चों का समय आने जाने में ही बर्बाद हो जाएगा तो बच्चे खेलकूद नहीं सकेंगे, जिससे उनका स्वास्थ्य भी खराब हो सकता है. हां जब बच्चा बड़ी कक्षा में पहुंच जाता है तो उसको होमवर्क बहुत सारे मिलने लगते हैं, और समय के अभाव की वजह से बच्चे को एग्जाम की तैयारी करने में भी समस्या होने लगती है. इसीलिए सभी नजदीकी अच्छे स्कूलों की लिस्ट बनाएं और देखें कौन सा सबसे अच्छा स्कूल है ,जो आप के सबसे नजदीक हो. शुरू में कम से कम 5 स्कूलों की लिस्ट बनाए जो आपके घर से सबसे नजदीक हो और जिसमें आपके बच्चे को अच्छी शिक्षा मिल सकती हो.

  1. छात्रों की सुरक्षा के दृष्टि से –

माता पिता जब अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, तो उनकी सुरक्षा उनकी सबसे पहली प्राथमिकता रहती है. हालांकि स्कूलों में उनको किसी भी तरीके का नुकसान होने का खतरा लगभग असंभव के बराबर रहता है. परंतु जब किसी भी प्रकार खराब खबरें छात्रों के विषय में आती है, तो पेरेंट्स चिंतित हो जाते हैं. इसीलिए माता-पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चे को कैसे स्कूल में एडमिशन करवाना चाहिए जहां पर स्कूल में कैमरा हो और अनजान लोगों को स्कूल के अंदर आना और संभव हो और इतना ही नहीं बच्चों को जरूरत पड़ने पर सेहत संबंधी सुविधाएं भी जल्दी मिल सके.

  1. स्कूल और बोर्ड की जानकारी –

जिस किसी भी स्कूल में आप अपने बच्चों का एडमिशन कराएं ध्यान रखें कि वह स्कूल राज्य या राष्ट्रीय एजुकेशन बोर्ड से संबंधित एवं मान्यता प्राप्त होना आवश्यक है. जो भी स्कूल बोर्ड ऑफ एजुकेशन से मान्यता प्राप्त होते हैं , उनका करिकुलम सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों से मिलता है. यदि आपको किसी कारणवश स्कूल बदलना है, तो याद रखें अगर पिछला स्कूल बच्चे का सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त था, तो स्कूल  बदलने के दौरान भी सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल ही चुने जिससे बच्चों को करिकुलम बदलने से किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी.

  1. स्कूल की सुविधा के अनुसार – 

जैसा कि सभी अभिभावक जानते हैं, कि उनके बच्चों का ज्यादातर समय स्कूल में ही बीतता है. इसके लिए अभिभावकों को यह देखना जरूरी है, कि उनके बच्चे के लिए स्कूल में एजुकेशन ,मनोरंजन एवं एक्स्ट्रा करिकुलम के लिए जैसी व्यवस्थाएं मौजूद है या नहीं. बच्चों के लिए स्कूल में कंप्यूटर लैब लाइब्रेरी, ऑडिटोरियम, प्ले ग्राउंड स्विमिंग पूल, इंडोर गेम्स और बेसिक सुविधाएं जैसे कि  , वॉशरूम टॉयलेट , पानी एवं मेडिकल की सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए. इन सभी चीजों को इग्नोर करना नहीं चाहिए और बच्चों की सुविधा सर्वप्रथम देखनी चाहिए.

  1. स्कूल की फीस का ध्यान रखें –

जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि आजकल शिक्षा का क्षेत्र भी व्यवसाय के क्षेत्र जैसा हो गया है. शिक्षा का चाहे जो भी हो मगर महंगाई के दौर में शिक्षा ग्रहण करना बहुत ही ज्यादा महंगा हो गया है. यदि आप अपने बच्चों के लिए किसी भी प्रकार के एडमिशन के लिए चयन कर रहे हैं, तो अपने बजट को ध्यान में रखकर इसका चयन करें. यह बिल्कुल गलत है, कि जहां पर ज्यादा फीस लगती है. वहीं पर शिक्षा अच्छी तरीके से छात्रों को प्रदान की जाती है. अगर आप थोड़ा रिसर्च करेंगे तो देखेंगे कि कम फीस वाले स्कूलों में भी छात्रों को अच्छी शिक्षा प्रदान की जाती है.

  1. बच्चों केलिए सब्जेक्ट चुनने की आजादी –

 किसी भी स्कूलों में अपने बच्चों का दाखिला कराने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि, आपका बच्चा किस विषय को पढ़ने में ज्यादा रुचि रखता है. और इतना ही नहीं वह किस विषय में अपने आपको काफी मजबूत समझता है. इन सभी का पता लगाकर अपने बच्चों के लिए इसी के हिसाब से स्कूल का चयन करना चाहिए. कुछ ऐसे ही स्कूलों का लिस्ट तैयार करें जिसमें आपके बच्चे को पसंद आने वाले  विषय पढ़ाये जाते हों. और हो सके तो इस बात का भी ध्यान रखें कि,  उसी विषय से संबंधित अगर आप के अगल-बगल में कोई भी बच्चा किसी स्कूल में पढ़ने जाता है, तो उस स्कूल की भी जांच करें और उसी हिसाब से अपने  बच्चों का दाखिला कराएं. अगर आपके पड़ोसी में कोई ऐसा  बच्चा मिल गया जहां पर आपके बच्चे को पसंदीदा सब्जेक्ट भी मिल जाए और उसके लिए उसका साथी , फिर उसका उसी  स्कूल में दाखिला कराना चाहिए. ऐसा करने से उस बच्चे की भी, आपके बच्चे को हेल्प मिल जाएगी.

  1. ट्यूशन की आवश्यकता ना पड़े आपके बच्चे को –

अपने बच्चों के लिए ऐसे स्कूल का चयन करें जहां पर सभी विषयों का अच्छे से अध्ययन करवाया जाता  हो. ऐसा स्कूल चयन ना करें जिसमें आपके बच्चे को सभी विषयों का सही तरीके से अध्ययन ना करवाया जाता हो, और आप स्कूल की फीस भी वहन करें और उन्हीं विषयों को अच्छे से पढ़ने के लिए ट्यूशन फीस चुकानी पड़े. इसीलिए आपके लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण है, कि आप ऐसे स्कूल का चयन करें जहां पर आपके बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा का स्तर मौजूद हो.

  1. आपके बच्चों के लिए अच्छा करिकुलम भी जरूरी – 

बहुत से अध्ययनों के बाद पता चला कि, पढ़ाई के साथ साथ आपके बच्चों के लिए खेलकूद का भी अपना एक विशेष महत्व होता है. इसलिए ऐसे स्कूल का चयन करें जहां पर पढ़ाई के साथ-साथ एक्स्ट्रा करिकुलम भी करवाया जाता है, जैसे- स्कूल में स्पोर्ट्स, फिजिकल एक्टिविटी, ड्रामा, म्यूजिक, एंटरटेनमेंट, डिबेट, कविताएं या कहानियां जैसी एक्टिविटी भी एक्स्ट्रा करिकुलम के अंतर्गत करवानी जरूरी है. एक्स्ट्रा करिकुलम करवाने से छात्रों के अंदर मानसिक एवं शारीरिक रूप से विकास होता है. इन सभी चीजों से आपके बच्चों का पूरी तरीके से विकास होता है, इसलिए एक्स्ट्रा करिकुलम भी आपके बच्चों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण चीजों में से एक है.

आजकल के पेरेंट्स अपने बच्चों के लिए स्कूल चुनते समय क्या देखते हैं ?

सभी माता-पिता चाहते हैं, कि उनका बच्चा हर क्षेत्र में तेज हो और उसको सभी क्षेत्रों के बारे में जानकारी हो और इसीलिए वे अपने बच्चों के लिए स्कूल चुनते समय कुछ इस तरीके से ध्यान देते हैं.

 शिक्षक अधिक प्रशिक्षित हो और हाई पोस्टेड हो – 

जब आप अपने बच्चों को किसी भी स्कूल में दाखिला कराते हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है. बच्चों के पेरेंट्स पहले यह देखते हैं कि जिस भी स्कूल में वे अपने बच्चों का एडमिशन कराने वाले हैं उसमें एजुकेटेड टीचर हो जो आपके बच्चों का भविष्य सवारेंगे. एक प्रशिक्षित शिक्षक  के होने से आपके बच्चों के विकास पर इसका अच्छा असर पड़ता है.

पॉजिटिव  और भरोसेमंद  शिक्षक –

जिस भी स्कूल में माता-पिता अपने बच्चों का एडमिशन करवाते हैं, वह इस बात का ध्यान रखते हैं कि वहां का टीचर केयरिंग, पॉजिटिव और भरोसेमंद हो. यदि शिक्षक केरिंग पॉजिटिव और भरोसेमंद वाला होता है, तो आपके बच्चों की अच्छी तरीके से देखभाल करेगा और इससे बच्चे चीजों को अच्छी तरीके से सीखने के लिए उत्साहित भी होंगे. यदि अध्यापक नकारात्मक व्यक्ति वाला है, जैसे बच्चे को डांटने और चिल्लाने वाला उसका स्वभाव है, तो बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ता है. 

बच्चों के साथ घुल -मिलकर  रहने वाले शिक्षक –

मां बाप अपने बच्चों का दाखिला कराते समय देखते हैं, कि जिस स्कूल में सभी टीचर का स्वभाव अपने छात्रों के प्रति  इंगेजिंग टाइप का रहे हैं, जो बच्चों के साथ घुल मिलकर रहते हैं उनसे बातचीत करते हैं. यदि इस टाइप में शिक्षक आप अपने बच्चों को  जिस भी स्कूल में एडमिशन करा रहे हैं, वहां मौजूद हो तो बच्चों को और भी लोगों  के साथ बातचीत करने का प्रोत्साहन मिलता है. जिससे उनका शर्मीलापन भी धीरे-धीरे खत्म होने लगता है. 

पॉजिटिव -डिसिप्लिन सिखाने वाला शिक्षक –

जिस भी स्कूल में अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराते हैं, वह देखते हैं, कि वहां के शिक्षक अपने छात्रों को सामाजिक एवं मानसिक रूप से मजबूत करने के लिए प्रेरित करते हो. बच्चों को खाने-पीने, रहने से लेकर बातचीत करने के  तौर तरीके सिखाते  हो. बच्चे को ऐसा माहौल मिलना चाहिए स्कूल में जहां पर उनको पॉजिटिव -डिसिप्लिन सीखने का मौका मिले और  टीचर बच्चे को हर बात ध्यान पूर्वक समझाएं और सभी चीजें सिखाने की कोशिश करें ना कि मारपीट कर जबरदस्ती करके. ऐसा करने से बच्चों में उग्रशीलता  वाला स्वभाव उत्पन्न होने लगता है. जिससे बच्चों के अंदर नकारात्मक-स्वभाव  उत्पन्न होने लगता है, और वे किसी की भी बात को नहीं सुनते है.

प्राचीन  गुरुकुल  और  आधुनिक  स्कूल  में  क्या  अंतर  है  ?

प्राचीन  काल  में  लोगों  के  बच्चे  “गुरुकुल”  में  पढ़ते  थे ,  लेकिन  इस  आधुनिक  दुनिया  ने  “गुरुकुल”  को आधुनिक  शिक्षा  के  रूप  में  बदल  दिया  है.  आइए  जानते  हैं ,  आधुनिक  शिक्षा  और  प्राचीन  काल  के  “गुरुकुल” के  बीच  क्या  अंतर  है.

गुरुकुल  में  अध्ययन  के  फायदे  :-

गुरुकुल  के  शिक्षक  अपने  छात्रों  को  धर्म  एवं  वेदों  के  बारे  में  ज्ञान  देते  थे. इतना  ही  नहीं  अपने  छात्रों  को जीवन  यापन  करने  के  लिए  व्यवहारिक  दृष्टिकोण के  बारे  में  भी  ज्ञान  प्रदान  करते  थे. तब   के   शिक्षकों  का मुख्य   उद्देश्य  अपने  छात्रों  को  मानवीय – मूल्य  सिखाना था. इसी लिए  उस समय के शिक्षकों  के  लिए  मानवीय -मूल्य  बहुत  महत्वपूर्ण  रहता  था.

तब  के  जमाने  की  शिक्षा  प्रणाली  आज  की  शिक्षा  प्राणी  से  बिल्कुल  अलग  थी. गुरुकुल  में  छात्रों  के चरित्र  को बेहतर  बनाने  का  तरीका  और  प्रयास करना  सिखाया  जाता  था.

तब  के  जमाने  में  गुरुकुल  में  संस्कृत  भाषा के जरिए ही बातचीत की जाती थी. और उस समय की ज्यादातर पुस्तकें संस्कृत भाषा में थी और संस्कृत भाषा को ही बढ़ावा दिया जाता था. तब के शिक्षक अपने छात्रों को  सांस्कृतिक, पारंपरिक और सभी जरूरी गुणों के बारे में जागरूक करते थे. छात्र उस समय अपने कौशल को अधिक कुशलता से विकसित करने के लिए प्रयास करते थे, और खुद को अधिक अनुशासित करते थे.

उस समय छात्रों को गुरु द्वारा दिया गया किसी भी प्रकार का निर्देश उनके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण रहता था. गुरुकुल के छात्रों को शिक्षक या गुरुओं के निर्देशों का पालन करना सिखाया जाता था. उस समय के छात्र ड्रेस के रूप में धोती और कुर्ता पहनते थे. उस  समय किसी भी प्रकार का विशेष ड्रेस कोड नहीं था. गुरुकुल में छात्रों को किसी भी प्रकार की जीवन में आने वाली विषम परिस्थिति से लड़ने के लिए ज्ञान दिए जाते थे. ताकि छात्र अपने आपको आने वाली चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर सकें.

आधुनिक स्कूल में पढ़ने के फायदे :-

आधुनिक स्कूल “गुरुकुल” से बिल्कुल अलग है. आधुनिक स्कूलों में शिक्षक की बातें आसानी से छात्रों को समझाने के लिए अलग-अलग तरह के शिक्षण उपकरण और प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया जाता है. प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से विकास के कारण शिक्षा प्रणाली लगभग बदल गई है. जैसे- जैसे कंप्यूटर का क्षेत्र विकसित हो रहा है, वैसे- वैसे ही कंप्यूटर के बारे में ज्ञान प्राप्त करना भी आवश्यक हो गया है.

ज्यादातर अब स्कूलों में बात करने का तरीका इंग्लिश भाषा या हिंदी भाषा हो गया है. संस्कृत भाषा में लगभग बात करने की परंपरा खत्म हो चुकी है. लेकिन अभी भी कुछ ऐसे स्कूल मौजूद है, जहां पर छात्र संस्कृत पढ़ते हैं. आधुनिक तकनीक से स्कूल बहुत तेजी से विकसित होते हैं, और वह सभी अपने छात्रों को खेल और अन्य प्रकार की सुविधाएं प्रदान करते हैं. छात्रों को आराम से पढ़ने के लिए अब ज्यादातर स्कूलों में एयर कंडीशनर या पंखों की सुविधा दी प्रदान की जाती है.

 आज के जमाने  में छात्रों को स्कूल में जाने के लिए बेल्ट, बैच  और आईडी कार्ड के साथ-साथ एक अच्छी तरह से स्त्री की हुई ड्रेस को पहनना अनिवार्य हो जाता है. आज के समय में शिक्षक  हर विषय में जैसे हिंदी, गणित, अंग्रेजी एवं विज्ञान इत्यादि के बारे में पढ़ाते हैं, और उनका मार्गदर्शन भी करते हैं. लेकिन हम बता दें कि इस समय के साथ किए गए सभी प्रकार के बदलाव बुरे नहीं होते और हमें भी समय के साथ अपने अंदर बदलाव लाने होंगे. और यही कारण है कि आजकल के स्कूलों में सभी प्रकार की सुविधाएं छात्रों के लिए प्रदान की जा रही है. उस समय में गुरुकुल कुछ ही मात्रा में थे और छात्रों के लिए एक ही गुरुकुल काफी  पर्याप्त रहता था. परंतु जनसंख्या वृद्धि के कारण स्कूलों का विस्तार और स्कूलों में परिवर्तन होता जा रहा है.

इन सभी महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर माता-पिता को अपने बच्चों के लिए एक अच्छे स्कूल का चयन करना चाहिए. अपने नजदीकी स्कूलों की लिस्ट बनाएं और इन सभी महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर स्कूलों का चयन करें इससे आपको काफी आसानी हो जाएगी.

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Karnika
कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं | यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं

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